बाल व्यास श्वेतिमा माधव प्रिया की मधुर वाणी में गूंजी कृष्ण लीलाएं
-
By Admin
Published - 22 February 2025 16 views
"बांस की बांसुरिया पर घड़ों इतराई" गीत पर श्रद्धालु हुए भाव-विभोर
स्वतंत्र पत्रकार विजन
पी एन पाण्डेय
सूरत, राम रामेश्वर मंदिर – श्रीमद्भागवत महापुराण साप्ताहिक ज्ञान यज्ञ के पंचम दिवस पर आयोजित इस भव्य आयोजन में भक्तों ने आध्यात्मिक आनंद और भक्ति का अद्भुत संगम अनुभव किया। अंतर्राष्ट्रीय बाल व्यास श्वेतिमा माधव प्रिया की संगीतमय प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को कृष्ण भक्ति में सराबोर कर दिया। उनकी मधुर वाणी में जब कृष्ण नामकरण, माखन चोरी लीला और गोवर्धन पूजा के प्रसंगों का सजीव वर्णन हुआ, तो पूरे मंदिर परिसर में भक्तिरस प्रवाहित हो उठा।
संगीतमय कथा में बहा भक्ति का प्रवाह
कार्यक्रम की शुरुआत में, मंदिर को भव्य रूप से सजाया गया था, जिससे श्रद्धालुओं को दिव्य वातावरण का अनुभव हुआ। जैसे ही श्वेतिमा माधव प्रिया ने अपनी वाणी से कथा प्रारंभ की, श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। कथा के दौरान जब उन्होंने "बांस की बांसुरिया पर घड़ों इतराई" गीत प्रस्तुत किया, तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्वयं श्रीकृष्ण गोकुल में गोपियों के उलाहने सुनकर आनंदित हो रहे हों। भक्तजन मंत्रमुग्ध होकर कथा का रसास्वादन करते रहे और संगीत की लय पर झूम उठे।
सामाजिक समरसता संस्था की विशेष भूमिका
इस भव्य आयोजन में सामाजिक समरसता संस्था के अध्यक्ष राहुल सिंह एवं श्रुति सिंह की विशेष भूमिका रही। उनकी अगुवाई में यह साप्ताहिक ज्ञान यज्ञ श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बन गया। कथा के दौरान श्रद्धालु “राधे-राधे, हरे कृष्ण” के मंत्रों का निरंतर उच्चारण करते रहे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बन गया।
उपस्थित गणमान्यजनों ने बढ़ाई शोभा
कार्यक्रम में समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों और आध्यात्मिक गुरुओं की गरिमामयी उपस्थिति ने इसे और अधिक विशेष बना दिया। प्रमुख रूप से डॉ. डी. आर. रेवाला, सुशील सिंह, डॉ. ए. के. सिंह, संदीप दीक्षित, कौशल दुबे, जितेंद्र सिंह, जगदीश सहानी, मिथलेश जी, राजमनी पाण्डेय, श्री राकेश भाई शर्मा, अखिलेश शर्मा, प्रकाश भाई, विजय शर्मा, लाल बाबू शर्मा, आचार्य गौरव पाण्डेय, मदन मोहन मालवीय, आकाश, डॉ. रागिनी पाण्डेय, शुभम सिंह, जितेंद्र, कृष्णा सिंह, राम आशीष पाण्डेय, प्रदीप पाण्डेय एवं दीप नारायण सहित हजारों श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
भक्ति की कोई उम्र नहीं होती
इस आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया कि भक्ति का कोई बंधन नहीं होता और श्रद्धा की कोई उम्र नहीं होती। जब प्रेम और श्रद्धा की धारा बहती है, तो हर हृदय श्रीकृष्ण की लीलाओं में विलीन हो जाता है। इस कथा के माध्यम से भक्तों ने न केवल आध्यात्मिक शांति प्राप्त की, बल्कि समाज में प्रेम, समरसता और भक्ति के संदेश को भी आत्मसात किया।
सम्बंधित खबरें
-
स्वतंत्र पत्रकार विजनपी एन पाण्डेयहैदराबाद। सरकार द्वारा तेलुगु को अनिवार्य द्वितीय भाषा बनाए जाने क
-
स्वतंत्र पत्रकार विजनपी एन पाण्डेयदेवनागरी उत्थान फाउंडेशन की सह संस्थापक डॉक्टर प्रमिला पाठक करीब 4
-
सूरत में सम्पन्न हुआ संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ, बाल व्यास श्वेतिमा माधव प्रिया ने किया
-
सूरत में सम्पन्न हुआ संगीतमयी श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ, बाल व्यास श्वेतिमा माधव प्रिया ने किया